आँसू शायरी


अस्क ही मेरे दिन हैं अश्क ही मेरी रातें, अश्कों में ही घुली हैं वो बीती हुयी बातें।


किसी को बताने से मेरे अश्क रुक ना पायेंगे, मिट जायेगी जिंदगी मगर गम धुल न पायेंगे।


जिस तरह हँस रहा हूँ मैं पी-पी के गर्म अश्क, यूँ दूसरा हँसे तो कलेजा निकल पड़े।


मेरी आँखों में आँसू नहीं बस कुछ नमी है, वजह तू नहीं बस तेरी ये कमी है।


मेरे दिल में न आओ वर्ना डूब जाओगे, गम के आँसू का समंदर है मेरे अन्दर।


मजबूरी में जब कोई जूदा होता है, जरूरी नहीं कि वो बेवफा होता है, देकर वो आपकी आँखों में आँसू, अकेले में आपसे ज्यादा रोता है।



कौन कहता है कि आँसूओं में वजन नहीं होता, एक भी छलक जाए तो मन हल्का हो जाता है।


प्यार कर के कोई जताए यो जरूरी तो नहीं, याद कर के कोई बताये ये जरूरी तो नहीं, रोने वाले तो दिल में ही रो लेते हैं अपने, कभी आँख में आसूं आये ये जरूरी तो नहीं।


पलकों के बंध तोड़ के दामन पे गिर गया, एक अश्क मेरे जब्त की तौहीन कर गया।


सदियों बाद उस अजनबी से मुलाकात हुई, आँखों ही आँखों में चाहत की हर बात हुई, जाते हुए उसने देखा मुझे चाहत भरी निगाहों से, मेरी भी आँखों से आंसूओं की बरसात हुई।


आगोश-ए-सितम में छुपाले कोई, तन्हा हूँ तड़पने से बचा ले कोई, सूखी है बड़ी देर से पलकों की जुबां बस आज तो जी भर के रुला दे कोई।