आज वो अपने सजन की बारात का इन्तजार कर रही होगी Aaj wo apne sajan ki barat ka intzar kar rhai hogi

उसके दर्द को बिना कहे जान लेता था मैं

उसकी हर बात को हसकर मान लेता था मैं।

ना जाने कोन-सी खता हुई के बो मुझसे नाता तोड़ गई

ऐसी कोन-सी गलती की मैंने जिसके लिए बो मेरा सात छोड़ गयी।

अजीब खेल भी इस किसमत ने खेला है

ना चाहते हुए भी मुझे इस दलदल में धकेला है

मुझे दी है वो सजा जो गलती मैंने की ही नहीं

ये मोहब्बत हो झमेला मैंने जानबुझकर अपने सर पर लिया भी नहीं

उसी ने मुझे अपने प्यार में फसाया ओर फिर बीच राह में छोड़ दिया

मेरे नादान से इस दिल को उसने बड़ी बेरहमी से तोड़ दिया

आज बो अपने सजन की बारात का इन्तजार कर रही होगी

इधर मैं कुछ कर ना लू बुरा, यो सोच कर मेरी माँ डर रही होगी

वो खुशी से फूली ना समा रही होगी शादी का दिन नजदीक आता देख

जो कहती थी की सातों जन्म के लिए लिखे है तेरे मेरे लेख

लाल जोड़ा भी उसने बड़ी पसन्द से अपने लिए सिलवाया होगा

इस बीच उस बेवफा को मेरा ख्याल नहीं आया होगा

बहुत अजीब खेल खेलती है ये किस्मत भी कभी-कभी

जिनके लिए छोड़ी दुनियाँ वो निकले बेवफा सभी के सभी

उसकी डोली जब इधर से गुजरे तो कहना के मैं भी आ रहा हूँ

उसकी खूबसूरती को सब कुछ समझ कर मोहब्बत करने की सजा पा रहा हूँ

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