तेरी डौली के पीछे मेरा जनाजा आ रहा था

तेरी डोली के पीछे मेरा जनाजा आ रहा था

तु जिन्दा हो कर भी बेचैन ना थी ओर मैं मुर्दा होकर भी मचल रहा था।

लोग शादी में तेरी खूशी को मारे पागल हो रहे थे

इधर मेरा जनाजे में सब जोर-जोर से रो रहे थे।

कहा होगा तेरी दोस्त ने जब की तेरा आशिक अब मर चुका है

उसकी जिस बात को तु मजाक समझती थी हकीकत में वो कर चुका है।

जब तु एक पल के लिए घबराई होगी

तु मेरी ना हुई तो मर जाऊँगा मैं तुझे मेरी ये बात याद आयी होगी।

मेरे दोस्त ने बताया था की तुम लाल जोड़े में बला की खुबशुरत लग रही थी

आने-जाने वाले हर मेहमान को अपनी खूबशूरती से ठग रही थी।

मैं जानता था कि लाल जोड़ा ओर होथों में मेहन्दी कयामत ढायेगी तू

मगर कभी ये ना सोचा था कि मुझे भुलकर किसी ओर के  नाम का सिन्दूर अपने माथे पर लगायेगी तू।

मैंने दिल पर रखा पत्थर तुम अब मेरी नहीं हो सकती मैंने अब ये सोच लिया

मेरी वो साँसे जिन पर तेरा हक था मैंने उन साँसों को भी रोक लिया।

मैं मरने के बाद भी नजरे दरवाजे पर टिकाए बैठा था

मत उठाओं मेरा जनाजा वो आती होगी मैं रह-रह कर सबको येही कहता था।

जब मुझे कब्रस्तान में ले जाकर दफनाने लगे थे मेरे अपने

मैंने अपने साथ तभी समेट लिए थे हमारे सभी सपने।

किसी ने कहा था कि ऊपर लोग खाली हाथ जाते है

मगर उन्हे क्या पता मेरे जैसे कुछ अभागे अपने साथ अपने टुटे सपने भी लेकर जाते है।

कब्र पर अपनी आखरी मिट्टी पड़ने तक मैंने तुम्हारा इन्तजार किया था

अब दफना दो मुझे वो नहीं आयेगी मैंने ये फैसला दिल पर पत्थर रख कर किया था।

अगर तुम्हे वक्त मिले मेरे सपनों की, मेरे यादों की, तेरे किये हुए वादों की रोख को अपनी मांग में सजाने से

तो बस एक बार दो आशूँ बहा जाना मेरी कब्र पर किसी-न-किसी बहाने से।

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