नफरत शायरी


दिलों में गर पली बेजा कोई हसरत नहीं होती, 
हम इंसानों को इंसानों से यूँ नफरत नहीं होती।


अदावत तो है अपनी नफरतों के रहनुमाओं से… जो दिल में दे जगह उससे भला न क्यूँ सुलह कर लें।।


चला जाऊँगा मैं धुंध के बादल की तरह, 
देखते रह जाओगे मुझे पागल की तरह, 
जब करते हो मुझसे इतनी नफरत तो क्यों, 
सजाते हो आँखो में मुझे काजल की तरह।


वो दुश्मन बनकर मुझे जीतने निकले थे.. मुहब्बत कर लेते मै खुद ही हार जाता ।।


रूठी जो जिदंगी तो मना लेंगे हम, 
मिले जो गम वो भी सह लेंगे हम, 
बस आप रहना हमेशा साथ हमारे तो, 
निकलते हुए आंसुओं में भी मुस्कुरा लेंगे हम।


कभी उसने भी हमें चाहत का पैगाम लिखा था… सब कुछ उसने अपना हमारे नाम लिखा था.. सुना है आज उनको हमारे जिक्र से भी नफ़रत है.. जिसने कभी अपने दिल पर हमारा नाम लिखा था।।


कुछ इस अदा से निभाना है किरदार मेरा मुझको, 
जिन्हें मुहब्बत ना हो मुझसे वो नफरत भी ना कर सके।


खुदा सलामत रखना उन्हें, 
जो हमसे नफरत करते हैं, 
प्यार न सही नफरत ही सही, 
कुछ तो है जो वो सिर्फ हमसे करते हैं।


अगर हो वक़्त तो मुलाकात कीजिये, 
दिल कुछ कहना चाहे कुछ बात कीजिये, 
यूँ तो मुश्किल है हमसे दूर रहना, 
पर एक लम्हा मिले तो हमें याद कीजिये।


दिन भर भटकते रहते हैं अरमान तुझसे मिलने के, 
न ये दिल ठहरता है न तेरा इंतज़ार रुकता है।


रे हर ग़म को अपनी रूह में उतार लूँ, 
ज़िन्दगी अपनी तेरी चाहत में संवार लूँ, 
मुलाकात हो तुझसे कुछ इस तरह मेरी, 
सारी उम्र बस एक मुलाकात में गुजार लूँ।


कुछ लोग तो मुजसे सिर्फ इसलिए भी नफरत करते हैं..
क्योंकि..बहुत सारे लोग मुझसे प्यार करते हैं


तेरी नीली आँखों का मैं काजल बन जाऊं, 
तेरी आँखों में आँसू का मैं बादल बन जाऊं, 
ख्वाहिश तो मेरी हर पल है इतनी, 
तेरे रस्ते के काँटों का मैं चादर बन जाऊं।


मोहब्बत करने से फुरसत नहीं मिली दोस्तो…
वरना हम करके बताते नफरत किसको कहते हैं।


तुम नफरत का धरना कयामत तक जारी रखो,
मैं प्यार का इस्तीफा जिंदगी भर नहीं दूंगा।


महोब्बत और नफरत सब मिल चुके हैं मुझे,
मैं अब तकरीबन मुकम्मल हो चुका हूँ।


वो वक़्त गुजर गया… जब मुझे तेरी आरज़ू थी, 
अब तू खुदा भी बन जाए तो मैं सज़दा न करूँ।


जब नफरत करते करते थक जाओ,
तब एक मौका प्यार को भी देना।


कुछ इस अदा से निभाना है किरदार मेरा मुझको, 
जिन्हें मुहब्बत ना हो मुझसे वो नफरत भी ना कर सके।


नफरतों के जहां में हमको प्यार की बस्तियां बसानी हैं,
दूर रहना कोई कमाल नहीं, पास आओ तो कोई बात बने।


नफ़रत हो जायेगी तुझे अपने ही किरदार से,
अगर मैं तेरे ही अंदाज में तुझसे बात करुं।


हाँ मुझे रस्म-ए-मोहब्बत का सलीक़ा ही नहीं, 
जा किसी और का होने की इजाज़त है तुझे


तुझे प्यार भी तेरी औकात से ज्यादा किया था,
अब बात नफरत की है तो नफरत ही सही।


तेरी नफरतों को प्यार की खुशबु बना देता, 
मेरे बस में अगर होता तुझे उर्दू सीखा देता।


देख कर उसको तेरा यूँ पलट जाना 
नफरत बता रही है… 
तूने मोहब्बत गज़ब की की थी।


हमें बरबाद करना है तो हमसे प्यार करो,
नफरत करोगे तो खुद बरबाद हो जाओगे।


हाँ मुझे रस्म-ए-मोहब्बत का सलीक़ा ही नहीं, 
जा किसी और का होने की इजाज़त है तुझे।


देख कर उसको तेरा यूँ पलट जाना,
नफरत बता रही है तूने इश्क बेमिसाल किया था।


अगर इतनी ही नफरत है हमसे तो,
दिल से कुछ ऐसी दुआ करो,
की आज ही तुम्हारी दुआ भी पूरी हो जाये,
और हमारी ज़िन्दगी भी।


कभी उसने भी हमें मोहब्बत का पैगाम लिखा था,
सब कुछ उसने अपना हमारे नाम लिखा था,
सुना है आज उनको हमारे जिक्र से भी नफ़रत है,
जिसने कभी अपने दिल पर हमारा नाम लिखा था।


उसने नफ़रत से जो देखा है तो याद आया,
कितने रिश्ते उसकी ख़ातिर यूँ ही तोड़ आया हूँ,
कितने धुंधले हैं ये चेहरे जिन्हें अपनाया है,
कितनी उजली थी वो आँखें जिन्हें छोड़ आया हूँ।


तुम नफरत करो या मोहब्बत,
दोनों हमारे हक में बेहतर हैं,
नफरत करोगे तो हम तुम्हारे दिमाग में,
मोहब्बत करोगे तो दिल में बस जायेंगे।


गुजरे हैं इश्क़ में हम इस मुकाम से 
नफरत सी हो गई है मोहब्बत के नाम से 
हम वो नहीं जो मोहब्बत में रो कर के 
जिंदगी को गुजार दे… 
अगर परछाई भी तेरी नजर आ जाए 
तो उसे भी ठोकर मार दें।


खुदा सलामत रखना उन्हें, 
जो हमसे नफरत करते हैं, 
प्यार न सही नफरत ही सही, 
कुछ तो है जो वो हमसे करते हैं।


कुछ जुदा सा है मेरे महबूब का अंदाज,
नजर भी मुझ पर है और नफरत भी मुझसे ही।


वो नफरतें पाले रहे हम प्यार निभाते रहे,
लो ये जिंदगी भी कट गयी खाली हाथ सी।


फिर यूँ हुआ के गैर को दिल से लगा लिया,
अंदर वो नफरतें थी के बाहर के हो गये।


न मोहब्बत संभाली गई, न नफरतें पाली गईं,
अफसोस है उस जिंदगी का, जो तेरे पीछे खाली गई।


मोहब्बत करने से फुरसत नहीं मिली यारो,
वरना हम करके बताते नफरत किसको कहते है।


एक नफरत ही है जिसे,
दुनिया चंद लम्हों में जान लेती है, वरना..
चाहत का यकीन दिलाने में तो
ज़िन्दगी बीत जाती है।


चला जाऊँगा मैं धुंध के बादल की तरह, 
देखते रह जाओगे मुझे पागल की तरह, 
जब करते हो मुझसे इतनी नफरत तो क्यों, 
सजाते हो आँखो में मुझे काजल की तरह।


ये मत कहना कि तेरी याद से रिश्ता नहीं रखा,
मैं खुद तन्हा रहा पर दिल को तन्हा नहीं रखा,
तुम्हारी चाहतों के फूल तो महफूज रखे हैं,
तुम्हारी नफरतों की पीड़ को जिंदा नहीं रखा।


मत रख इतनी नफ़रतें अपने दिल में ए इंसान,
जिस दिल में नफरत होती है उस दिल में रब नहीं बसता।


लेकर के मेरा नाम मुझे कोसता तो है,
नफरत ही सही, पर वह मुझे सोचता तो है।



नफरत करने वाले भी गज़ब का प्यार करते हैं मुझसे, 
जब भी मिलते हैं कहते हैं कि तुझे छोड़ेंगे नहीं ।


तेरी नफरतों को प्यार की खुशबु बना देता, 
मेरे बस में अगर होता तुझे उर्दू सिखा देता।




एहसास बदल जाते हैं बस और कुछ नहीं,
वरना नफरत और मोहब्बत एक ही दिल में होती है।


वो वक़्त गुजर गया जब मुझे तेरी आरज़ू थी, 
अब तू खुदा भी बन जाए तो मैं सज़दा न करूँ।


नफरत करने वाले भी गज़ब का प्यार करते हैं मुझसे, 
जब भी मिलते हैं कहते हैं कि तुझे छोड़ेंगे नहीं ।

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