मेरी Girlfriend की शादी है



मै उसकी आँखों में इस तरह से खो जाया करता था…
वो सुनती थी दिन भर के किस्से और मै उसके कंधे को सिरहाना मान कर सो जाया करता था…


वो देखा करती थी मेरे चेहरे को ऐसे…
जैसे कोई माँ अपने बच्चे को निहारती है….


जितने प्यार से वो संवारती थी मेरे माथे पे बालों को…
अब नही कोई संवारती है…..


नज़रे उतारती थी बालाएं भी लिया करती थी….
चूम कर मेरा माथा वो मुझे दुवाएँ भी दिया करती थी….


मेरी मुस्कुराहटों पर उसने अपना जीवन वार दिया था…
माँ के बाद वो पहली लड़की थी जिसने मुझे इतना प्यार दिया था….


मै समंदर के किनारे की तपती धूप सा और वो बर्फ की ठंढी सिल्ली सी थी….
बेशक मुझे डांटती थी मेरी माँ की तरह पर अपने घर में भीगी बिल्ली सी थी….


मैं जब कभी गुस्सा होता था गरम लावे की तरह…
वो सहला कर मेरा सर गुस्सा उतार देती थी…


रात रात जाग कर वो फ़ोन पर देती थी हिदायतें मुझे….
जब कभी भी मै बीमार हो जाता तो वो बहते अश्कों के साथ मुझे बाँहों का हार देती थी…


वो उगते सूरज सी मेरी जिंदगी में में आयी थी उजाला करने….
मगर उसके जाते ही जिंदगी अमावास की काली रात से भी ज्यादा बदरंग हो गयी….


वो मेरी जान जो मेरे ही जिस्म का हिस्सा थी….
अपनों के हाथों मजबूर होकर किसी और की दुनिया में खो गयी….


एक दिन देखा था उसे लाल जोड़े में अपने पति की बाँहों में हँसते हुवे…
चुप चाप दिल पर पत्थर रख कर लौट आया था मै अन्दर ही अन्दर तरसते हुवे…


उस दिन मैंने अपनी जिंदगी से एक एक कर हर रंग उड़ता देख लिया था….
इतने सालों से जो सपने बिखरे पढ़े थे उसके इंतजार में उन सभी सपनो को समेत लिया था…


खुश हूँ इस बात से की वो अपनी जिंदगी में आगे बढ़ गयी…
जो मै आज तक ना कर पाया… वो कुछ महीनो में ही कर गयी……





वो पिछली रात सोयी होगी ये सोच कर की कल जब सुबह हो तो इस दुनिया में हम ना हों…
या फिर रक्खी होगी उसने शर्त रात से की ऐ रात तू यहीं रुक जा. तू कभी भी ख़तम ना हो….

मगर भला वक्त ने किसकी सुनी जो उसकी सुन लेता…
ये जमाना हाथों की लकीरें देखता है सिर्फ दिखावे के लिए ये मुक़द्दर हमारा खुद ही बुन लेता…

आज जब सुबह आँख खुली होगी तो मेरी तरह ही उसका दिल भी जोर से धड़का होगा…
जैसे मैं यहाँ तड़प रहा हूँ वैसे उसका भी मन मुझसे मिलने को तड़पा होगा…

मगर पैरों में बंधी बेड़ियों ने उसे मेरे पास आने से रोक लिया होगा…
“आज के दिन भी उदास क्यों है” मां ने ये कह कर उसे टोक दिया होगा….

इधर मै मनहूस आज की मनहूस शाम को आने तक से डर रहा हूँ…
उधर वो सबके बीच जीते जी अन्दर ही अन्दर मर रही होगी….

मैं यहाँ अपनी और उसकी तस्वीर को बार बार निहार रहा हूँ…
उधर वो लाश हो कर भी दुल्हन के रूप में सवर रही होगी….

उधर उसके घर लग रहा होगा बधाई देने के लिए मेहमानों का ताँता…
इधर मुझे दिलासा देने के लिए हर दोस्त है आता जाता…

वो अपने आंसुओं को काजल की ओट में कहीं छुपा रही होगी….
जो हूक़ उठ रही होगी मुझे सोच कर सीने में उसके.. उसे वो बड़ी कोशश के बाद दबा रही होगी….

मैं इधर मौत को अपने सामने देख रहा हूँ….
और वो मन ही मन मुझे बुला रही होगी…..

दे आया हूँ कसम की मेरे बिना भी वो जिंदा रहेगी….
मुस्कुराते हुवे जिंदगी बिताएगी दर्द होगा मगर किसी से ना कहेगी…

मेरे मालिक उसे इतनी हिम्मत देना की वो इन मुस्किल हालातों से लड़ सके…
उसे इतना मजबूत कर दे की जो शायद मै ना कर पता मेरी जान वो कर सके…..

उधर उसके मांग में कोई तीसरा भर रहा होगा सिंदूर और इधर मै सो जाऊंगा….
वो अपनी नयी दुनिया में ना चाहते हुवे भी कदम रखेगी और मै यहाँ दूसरी दुनिया का हो जाऊंगा….

उसके घर से उठ रही होगी डोली दूसरे घर जाने के लिए…
तभी उसकी सहेली दौड़ते हुवे उसके पास जाएगी मेरी मौत की ख़बर बताने के लिए…

मैं उसकी शादी में उसे एक तोहफा आज़ादी का दे कर जा रहा हूँ…
मेरी आखें भले ही बंद हो रही हैं मगर मैं उसकी ही ख़ुशी खुदा से मना रहा हूँ…..

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