Hindi Poetry

हार को तू मान न, जीत को तू ठान ले
मंजिलें हैं सामने, इनको तू पहचान ले।


जिंदगी में आगे बढ़ता जा,
पत्थरों का सीना चीर के रास्ता बनाता जा,
हौसले ना हैं कम, दुनियाँ को ये दिखाता जा,
मुश्किल रास्तों पर भी मंजिलें सजाता जा।


कौन कहता है खुदा तुझसे खफा है,
कौन कहता है वक़्त वेबफा है,
कभी तू दुआओं में ज्यादा असर ढूंढता था,
कभी तू वक़्त को नही पल को बुरा कहता था।


हार को तू मान न, जीत को तू ठान ले,
मंज़िलें हैं सामने, इनको तू पहचान ले।


निगाहों में मन्ज़िल थी, गिरे और गिरके सम्भलते रहे,
हवाओ ने बहुत कोशिश की, लेकिन चिराग थे जो
आंधियो मे भी जलते रहे।


ढूंढ लेते हैं अंधेरो में भी रोशनी,
जूगनू कभी रोशनी के मोहताज नही होते।
और जब टूटने लगें हौसले तब यही सोच लेना बिना मेहनत के हासिल तख्तो ताज नही होते।


हर को तू मान न,जीत की तू ठान ले
मंजिलें हैं सामने,इनको तू पहचान ले


जब भी तेरी आश छूटे, साथ छूटे, तू भी टूटे,
लेकिन कभी हौसला मत छोड़ना।
लोग दिल भी दुखायेगें, ठेस भी पहुचायेंगे,
लेकिन हौसला मत छोड़ना।


तेरी नईया पार हो ही जाएगी गिरते उभरते,
लेकिन कभी हौसला मत छोड़ना।
उन रिश्तों को कभी न तोड़ना,
जो रास्ते मे तेरा साथ देते है।


सफर तो कैसे भी पार हो ही जायेगा कोशिश करना,
लेकिन हौसला मत छोड़ना।
जिंदगी में सब कुछ किताबें ही नही सिखातीं है,
कुछ बातें ज़िन्दगी भी सिखाती है।


मुश्किले रास्ते में आना लाज़मी है,
लेकिन कभी हौसला मत छोड़ना।
जिंदगी तुझे रोकेगी, टोकेगी, लोग भी तुझ पर हसेंगे,
लेकिन तू हौसला मत छोड़ना।
जब भी तेरी आश छूटे, साथ छूटे, तू भी टूट
लेकिन कभी हौसला मत छोड़ना

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