Mehndi Mere Naam Ki Lagayi Thi Tune… मेहंदी मेरे नाम की लगाई थी तुने

मेहंदी मेरे नाम की लगाई थी तुने

जब-जब मैं दूर हुआ दि प्यार की दुहाई तुने।

तुझे याद है तु मेरे लिए कैसे सारा दिन भूखी-प्यासी रहा करती थी

मैं ना आउँगा तो तू व्रत नहीं तोड़ेगी एसे मुझसे कहा करती थी।

मुझे हल्की सी खरोच पर मेरी माँ की तरह डरा करती थी तू

वो दिन भी कैसे थे जो मोहब्बत मे दिलो जान से मुझपर मरा करती थी तू

मगर फिर ऐसा क्या हुआ जो तेरी मेहंदी पर किसी ओर का नाम चढ़ने लगा

जो मेरे बिना ना धड़कता था वो दिल कैसे हद से आगे बढ़ने लगा।

सच बताना ऐसी कोन सी मजबूरी जिसने तुझसे तेरा चाँद छिन लिया तू जिसके दिदार को तरसती थी

तेरे पिता का कोन सा सम्मान था वो जिसने तूझे वो सूरत भुला दी जिसके लिए तेरी आँखें बरसती थी।

बता अब किसके नाम का पहला निवाला तोड़कर तू व्रत पुरा किया करती है

पहले तू मुझपर मरा करती थी बता अब तू किस पर मरा करती है।

बता इसमें मेरी क्या गलती थी जो तू मुझसे इतना दूर हो गई

तेरे अपनों की कोन सी खूशी थी वो जिसके कारण मुझे छोड़ने पर मजबूर हो गई।

उनकी कुछ पल की खूशी के लिए मैं यहा बेमौत मर रहा हूँ

मेरे सब दोस्त कुछ बन रहे है ओर मैं यहा अपनी जवानी तबाह कर रहा हूँ।

क्या वो जो कस्में वादे किये थे वो सब यूही झुटे थे

तुझे याद है कि नहीं तेरे कारण ही मेरे अपने मुझसे रूठे थे।

सबको मुझसे जुदा करके आज तू खुद कहा बैठी है

मैं लेटा हूँ काटों की सेज पर ओर मखमल के बिस्तर पर आराम से लेटी है।

तुझे किसी ओर का होता देखकर मैं बुरी तरह टुट गया था

कुछ पल ऐसा लगा जैसे मेरे जिस्म का साथ ही मेरी रूह से छुट गया था।

काश की तू हिम्मत करके अपने जूबान पर लगे ताले को अपने पापा के सामने खोल देती

तो शायद हम साथ होते अगर तू एक बार हिम्मत करके अपने दिल की बात उन्हे बोल देती।

3 Replies to “Mehndi Mere Naam Ki Lagayi Thi Tune… मेहंदी मेरे नाम की लगाई थी तुने

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