Tujhe Aaj Bhi Yaad Karti Hun.


ख्याल मेरा रखा जाता है यहाँ भी…
लेकिन उतना नहीं जितना वो रखा करता था…


हाँ फ़िक्र करते हैं ये लोग भी मेरी…
मगर वो जो हा वो मेरी एक छींक से भी डरा करता था…


ऐसा नहीं की कुछ ख़ास बदला है उसके बाद ज़िन्दगी में मेरी…
बस थोडा सा तरीका बदला है और जीने की उम्मीद खो सी गयी है….


अभी कल ही तो कितना ख़ुश थे हम दोनों….
आज मै किसी और की हूँ और लगता है जैसे मेरी किस्मत ही सो सी गयी है….


उसके साथ थी तो अपनी ख़ुशी के लिए खुल कर जिया करती थी…
आज जिंदगी बीत रही है औरों को ख़ुश करने में…


बस सब को दिखाने के लिए ही सांसे चल रही हैं मेरी…
वरना जिंदगी बीत रही है ऱोज पल पल मरने में…..


कभी मैं बच्चों की तरह उसके सामने ज़िद किया करती थी….
मगर अब हर बात मैंने बड़ों की तरह दिल में दबा लेती हूँ…


खुल कर हंसती थी पहले… उससे लिपट कर रो लेती थी….
आज मैं झूठी हंसी के नीचे अपना हर दर्द दबा लेती हूँ….


घर वाले समझते हैं की उन्होंने जो किया वो सब सही था….
मगर मै आज भी उसके बिना हर पल थोडा थोडा मर रही हूँ…


यहाँ माँ देती है हर छोटी छोटी बात पर बेमतलब के ताने मुझे….
और वो माँ जो मुझे अपनी बेटी कहती थी.. उसे आज भी याद कर रही हूँ…


वो माँ कहती थी की वो अपने बेटे से ज्यादा मुझको प्यार देगी…
उतनी सुख सुविधा नहीं है घर उसके, पर वो हर वो ख़ुशी जो उससे बन पायेगी वो मुझपर वार देगी…..


सबको लगता है की बड़ा घर मिला है तो ऐश में कट रही होगी जिंदगी मेरी….
मगर किसे बताऊँ क उसका वो छोटा सा कमरा मुझे महलों से ज्यादा प्यारा था…


वो जो मेरी याद में आज भी शहर की गलिओं की खाक छानता है…..
वो जान था मेरी जो इस जग से न्यारा था….


वो आज भी देता है दुवायें इशारों में ख़ुश रहने की मुझे….
उसे क्या बताऊँ की ख़ुशी तो उसके दूर जाने के साथ ही चली गयी…


अपनी ख़ुशी का ठेकेदार माना था जिन्हें….
मेरी खुशियाँ उन्ही के हाथों छली गयीं…..


अब जो है वो ज़िम्मेदारियों और बस सांसों का हिसाब है….
मेरा दर्द कोई नही जानेगा क्यूंकि मेरे चेहरे पर मेरे अपनों का झूठा नकाब है….


वो मिले तो उससे कहना की हम उस जहाँ में मिलेंगे जिधर महोब्बत पाक होगी…
लूँगी साथ फेरे उसके साथ मैं और तब हम साथ रहेंगे.. ये देख कर कुदरत भी ख़ुशी से रोएगी…..


By – Salman Ahamad

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